केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (के.वि.प्रा) विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 70 द्वारा प्रतिस्थापित निरसित विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 की धारा 3(1) के अधीन मूल रूप से गठित एक सांविधिक संगठन है। इसकी स्थापना वर्ष 1951 में अंशकालिक निकाय के रूप में की गई थी और वर्ष 1975 में इसे पूर्णकालिक निकाय बनाया गया।

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के कार्य एवं कर्तव्य विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 73 के अधीन वर्णित है। इसके अतिरिक्त केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण को अधिनियम की धाराओं 3, 7, 8, 53, 55 और 177 के अधीन भी कई अन्य कार्यों का निर्वहन करना होता है।

धारा 73 - प्राधिकरण के कार्य एवं कर्तव्य
  1. राष्ट्रीय विद्युत नीति से संबन्धित मामलों पर केन्द्रीय सरकार को सुझाव देना, विद्युत प्रणाली के विकास के लिए अल्पावधिक और संदर्शी योजनाएं तैयार करना और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के हित में सहायक होने के लिए संसाधनों के इष्टतम उपयोग हेतु आयोजना एजेंसियों के कार्यकलापों का समंवय करना तथा उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और वहनीय विद्युत प्रदान करना
  2. विद्युतीय संयंत्रों, विद्युत लाइनों और ग्रिड से संपर्क के निर्माण के लिए तकनीकी मानक निर्दिष्ट करना
  3. विद्युतीय संयंत्रों और विद्युत लाइनों के निर्माण, प्रचालन और अनुरक्षण के लिए सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं निर्दिष्ट करना
  4. पारेषण लाइनों के प्रचालन और अनुरक्षण के लिए ग्रिड मानक निर्दिष्ट करना
  5. विद्युत के पारेषण और आपूर्ति के लिए मीटरों की संस्थापना के लिए शर्ते निर्दिष्ट करना
  6. विद्युत प्रणाली सुधारने और वृद्धि करने के लिए स्कीमों और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने को बढ़ावा देना और सहायता करना
  7. विद्युत उद्योग में संलग्न व्यक्तियों की कुशलता बढ़ाने के लिए उपायों का संवर्धन करना
  8. ऐसे किसी विषय, जिसपर सुझाव मांगा जाता है, पर केन्द्रीय सरकार को सुझाव देना अथवा किसी विषय पर उस सरकार को सिफारिशें करना अगर प्राधिकरण की राय में सिफारिशें विद्युत के उत्पादन, पारेषण, व्यापार, वितरण और उपयोग सुधारने में सहायता करेंगी
  9. विद्युत के उत्पादन, पारेषण, व्यापार, वितरण और उपयोग से संबन्धित रिकार्ड और आंकड़े एकत्रित करना तथा लागत, क्षमता, प्रतिस्पर्धात्मकता और ऐसे ही मामलों से संबंधित अध्ययन करना
  10. इस अधिनियम के अधीन प्राप्त सूचना को समय-समय पर सार्वजनिक करना और रिपोर्ट तथा जांच के प्रकाशन की व्यवस्था करना
  11. विद्युत के उत्पादन, पारेषण, वितरण और व्यापार को प्रभावित करने वाले विषयों में अनुसंधान का संवर्धन करना
  12. विद्युत का उत्पदन करने अथवा पारेषण करने अथवा वितरण करने के प्रयोजनार्थ कोई जांच करना अथवा कराना
  13. ऐसे विषयों पर किसी राज्य सरकार, लाइसेंसधारियों अथवा उत्पादक कंपनियों को सुझाव देना, जो उन्हें एक सुधरे हुए तरीके से विद्युत प्रणाली को अपने स्वामित्वधीन या नियंत्रणाधीन रखते हुए प्रचालित और अनुरक्षित करने में समर्थ बनाएगा और जहॉ आवश्यक हो दूसरी विद्युत प्रणाली का स्वामित्व अथवा नियंत्रण रखने वाली किसी अन्य सरकार, लाइसेंसधारी या उत्पादक कंपनी के साथ समंवय करना
  14. विद्युत के उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित सभी तकनीकी विषयों पर उपयुक्त सरकार और उपयुक्त आयोग को सुझाव देना
  15. इस अधिनियम के अधीन प्रदान किए जाने वाले ऐसे अन्य कर्यों का निर्वहन

उपयुक्त कार्यों और कर्तव्यों के अतिरिक्त केन्द्रीय विद्युत प्रधिकरण को विद्युत अधिनियम 2003 की अधोउल्लिखित धाराओं के अनुसार निम्नलिखित कार्य निष्पादन करने होते है:

धारा 3 - राष्ट्रीय विद्युत नीति और योजना
  1. केन्द्रीय सरकार कोयला, प्राकृतिक गैस, न्यूक्लियर पदार्थ अथवा सामग्रियों, जल विद्युत और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों जैसे संसाधनों के इष्टतम उपयोग पर आधारित विद्युत प्रणाली के विकास के लिए राज्य सरकारों और प्राधिकरण के परामर्श से समय-समय पर राष्ट्रीय विद्युत नीति और टैरिफ नीति तैयार करेगी
  2. केन्द्रीय सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय विद्युत नीति और टैरिफ नीति प्रकाशित करेगी
  3. केन्द्रीय सरकार उप-धारा (1) उल्लिखित राष्ट्रीय विद्युत नीति की राज्य सरकारों और प्राधिकरण के परामर्श से समय-समय पर समीक्षा अथवा संशोधन करेगी
  4. प्राधिकरण राष्ट्रीय विद्युत नीति के अनुसार राष्ट्रीय विद्युत योजना तैयार करेगा और ऐसी योजना पॉच वर्ष मे एक बार अधिसूचित करेगा
  5. बर्शते कि प्राधिकरण राष्ट्रीय विद्युत योजना तैयार करते समय प्रारुप राष्ट्रीय विद्युत योजना प्रकाशित करेगा और लाइसेंसधारियों, उत्पादक कंपनियों और जनता से उसपर यथानिर्धारित समय के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगा

    आगे बर्शते कि प्राधिकरण :

    1. केन्द्रीय सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद योजना अधिसूचित करेगा
    2. खंड (क) के अधीन अनुमोदन देते समय सरकार द्वारा दिए गए निर्देश, अगर कोई हो, को सम्मिलित करते हुए योजना को संशोधित करेगा
  6. प्राधिकरण राष्ट्रीय विद्युत नीति के अनुसार राष्ट्रीय विद्युत योजना की समीक्षा और संशोधन कर सकता है

धारा 8 - जल विद्युत उत्पादन

  1. जल विद्युत उत्पादन स्टेशन स्थापित करने का अभिप्रायः रखने वाली कोई भी उत्पादक कम्पनी प्राधिकरण की सहमति के लिए ऐसी राशि, जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचना द्वारा नियत की जाए, से अधिक अनुमानित पूंजी व्यय वाली स्कीम तैयार और प्रस्तुत करेगी
  2. प्राधिकरण उसे उप-धारा (1) के अधीन प्रस्तुत किसी स्कीम की सहमति देने के पूर्व विशेष रूप से इस संबंध में कि क्या वह उसकी राय में निम्नलिखित है या नहीं:
    1. प्रस्तावित नदी कार्य पेय जल, सिंचाई, नौचालन, बाढ़ नियंत्रण अथवा अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों की आवश्यकता के संगत विद्युत उत्पादन के लिए नदी अथवा उसकी सहायक नदियों के सर्वोत्तम अंतिम विकास की संभावनाओं की हानि पहुंचाएगा और इस प्रयोजनार्थ प्राधिकरण राज्य सरकार, केन्द्रीय सरकार अथवा ऐसी अन्य एजेंसियों, जिसे वह उपयुक्त समझे, के साथ परामर्श के बाद स्वयं यह संतुष्टि करेगा कि बांध और अन्य नदी कार्यों के लिए इष्टतम स्थान का पर्याप्त अध्ययन किया गया है
    2. प्रस्तावित स्कीम बांध की डिजाइन और सुरक्षा से संबंधित मानदंडों को पूरा करती है
  3. जहां किसी क्षेत्र में किसी नदी के विकास की बहुप्रयोजनीय स्कीम प्रचालनाधीन है, राज्य सरकार और उत्पादन कंपनी अपने कार्यकलापों को जहां तक वे परस्पर संबद्ध हैं ऐसी स्कीम के उत्तरदायी व्यक्ति के कार्यकलापों के साथ समंवित करेंगे

धारा 53 - सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति से संबन्धित उपबंध

    प्राधिकरण राज्य सरकारों के साथ परामर्श से निम्नलिखित के लिए उपयुक्त उपाय निर्दिष्ट करेगा:

  1. विद्युत के उत्पादन, पारेषण अथवा वितरण या व्यापार; अथवा आपूरित विद्युत के प्रयोग अथवा किसी विद्युत संयंत्र की विद्युत लाइन की संस्थापना, अनुरक्षण अथवा प्रयोग से उत्पन्न होने वाले खतरों से जनता (उत्पादन, पारेषण अथवा वितरण अथवा व्यापार में संलग्न व्यक्ति सहित) का संरक्षण करना
  2. किसी व्यक्ति कि व्यक्तिगत चोट अथवा किसी व्यक्ति की संपत्ति की क्षति या ऐसी संपत्ति के प्रयोग में हस्तक्षेप करने के जोखिमों को दूर अथवा कम करना
  3. किसी ऐसी प्रणाली, जो यथानिर्दिष्ट विनिर्दिष्टियों के अनुरूप है, के माध्यम को छोड़कर अन्य प्रणाली द्वारा विद्युत की आपूर्ति अथवा पारेषण निषिद्ध करना
  4. विद्युत की आपूर्ति अथवा पारेषण की विफलता अथवा दुर्घटना की उपयोक्त आयोग और विद्युत निरीक्षक को निर्दिष्ट प्रारूप में नोटिस देना
  5. किसी उत्पादक कंपनी अथवा लाइसेंसधरी द्वारा विद्युत की आपूर्ति अथवा पारेषण से संबंधित मानचित्र, संयंत्र और सेक्शन रखना
  6. उसके द्वारा या विद्युत निरीक्षक अथवा किसी व्यक्ति द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा निर्दिष्ट शुल्क के भुगतान पर मानचित्रों, योजनाओं और सेक्शनों का निरीक्षण करना
  7. वैयक्तिक चोट अथवा संपत्ति को क्षति पहुंचने या उसके प्रयोग में हस्ताक्षेप के जोखिम को दूर करने अथवा कम करने के प्रयोजनार्थ किसी उपभोक्ता के नियंत्रणाधीन किसी विद्युत लाइन अथवा विद्युत संयंत्र या किसी विद्युत उपकरण के संबंध में की जाने वाली कार्यवाई निर्दिष्ट करना

धारा 55 - मीटरों आधि का प्रयोग

  1. विद्युत के उत्पादन, पारेषण और वितरण अथवा व्यापार में उचित लेखाकरण और लेखापरीक्षा के लिए प्राधिकरण विद्युत के उत्पादन, पारेषण अथवा वितरण या व्यापार के ऐसे चरण पर और उत्पादन, पारेषण अथवा वितरण या व्यापार के ऐसे लाइसेंसधारी द्वारा मीटरों के संस्थापन का निर्देश दे सकता है

धारा 177 - विनियम बनाने के लिए प्राधिकरण की शक्तियां

  1. प्राधिकरण अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को साधारणतया लागू करने के लिए इस अधिनियम और नियमों के संगत विनियम बना सकता है
  2. विशेषकर उप-धारा (1) में सौपी गई शक्तियों की सामान्यता हो हानि पहुंचाए बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी अथवा किसी विषय की व्यवस्था कर सकता है, मुख्यतः
    1. धारा 34 के अधीन ग्रिड मानक
    2. धारा 53 के अधीन सुरक्षा और विद्युत आपूर्ति से संबंधित उपयुक्त उपाय
    3. धारा 55 के अधीन मीटरों का संस्थापन और प्रचालन
    4. धारा 70 की उप-धारा (9) के अधीन व्यवसाय के लेन-देन के लिए कार्यविधि के नियम
    5. धारा 73 के खंड (ख) के अधीन विद्युत संयंत्रों और विद्युत लाइनों तथा ग्रिड से संपर्क के निर्माण के लिए तकनीकी मानक
    6. प्रपत्र और तरीका, जिसमें और समय, जब राज्य सरकार और लाइसेंसधारी धारा 74 के अधीन सांख्यिकी, विवरणी अथवा अन्य सूचना प्रस्तुत करेंगे
    7. अन्य कोई विषय जिसे निर्दिष्ट किया जाना है अथवा निर्दिष्ट किया जा सकता है
  3. इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा बनाए सभी विनियम पिछले प्रकाशन की शर्तों के अधीन होंगे।